1. खाली सफे ...

खाली सफे

मुझे रहने दो कागज़ पर ही लफ्ज़ बनकर
यहाँ खुलती है जुंबा, होंठ सील जाते हैं,
कहना नहीं चाहते कमबख्त चंद शेर धोखा दे जाते हैं
फिर क्यों गला घोटूं इस नीली स्याही का 
जब खाली सफ़े भी बहुत कुछ कह जाते  है...

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