कलमकार की ख्वाहिश नहीं आह की कोई चिंता, नहीं वाह की है ख्वाहिश, निष्पाप मां करूं तेरी साधना, मेरे मस्तिष्क को रखना पवित्र... विवेक रखना मेरा शुद्ध, साहस से करना नहीं वंचित, मानवीय पीड़ाओं का मैं, वर्णन कर सकूं बेबाक सचित्र... शब्द मेरे हो इतने अनमोल, छलियों को करे अचंभित, वेदनाओं का करूं ऐसा वर्णन, पल में पत्थर हो जाये द्रवित, माया की तराजू तोले नहीं, बदले कभी नहीं मेरा चरित्र, कलम बंधन में बंधे सके, मुझे बनाना नहीं इतना दरिद्र, निश्चिंत रहूं मैं इतना, निर्बल का कर सकूं जिक्र, हक की लड़ाई का हो मामला, किसी तीस मार खां का ना करूं फिक्र, मजबूर कर सके कोई नहीं, लालसाएं हो इतना सीमित, गलतियां ख़ुद की स्वीकार करूं, मेरे दिल को रखना पवित्र... कपटियों का भय कम नहीं हो, विचारधारा हो नहीं मेरा दूषित, मेहरबानी तेरी मुझपर इतनी रहे, नई रचना तेरे चरणों में करता रहूं अर्पित,
जुनून की ज्वाला... --------------------------------------------- घनघोर अंधकार से जब घिरा हो मन, राहें सब ओझल, मझधार में हो जीवन, देवता हो कुपित, मुंह मोड़ ले परिजन, जीवन से निराश, विचलित हो अंतर्मन, ऐसे में बंधु तुम बिल्कुल मत घबराना, सारी दुनियां को थोड़ी देर भूल जाना, सिर्फ किताबों से तुम कर लेना याराना, समस्याएं सारी होंगी हल, इज्जत करेगा जमाना। अपेक्षाओं की बोझ से दब क्यों मर रहा है, क्या होगा कल, क्यों इतना डर रहा है, मत हो नर निराश, कर छोटा सा प्रयास, केंद्रित कर अपनी ऊर्जा, लिख नया इतिहास, आंख दिखाने वाले भी एक दिन आंख झुकाएंगे, था एक मेहनती आदमी, शौक से सबको बताएंगे, आओ करें प्रण, जुनून की ज्वाला है जलाना, चुनौतियों के समंदर में हमें खुद को है आजमाना...।
खैरियत पूछने वाला सब शुभचिंतक नहीं होता है, रजाई ओढ़कर घी पीने वाला भी यहां खूब रोता है, शराबियों को पकड़ने की आपाधापी खूब मची है, जरा उन्हें भी पकड़िए जो इंसानों का खून पीता है,
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