2. बुद्धम शरणम गच्छामि...

बुद्धम शरणम गच्छामि...

उसने एक नहीं कई कई सीमाओं को तोड़ा था,
ज्ञान से लबालब, अंहकार का पन्ना कोरा था,
सिंहासन के लिए महाभारत तो होता ही रहा है,
सिद्धार्थ ने जनकल्याण के लिए सब छोड़ा था,

कम बोलते थे फिर भी चारों ओर खूब ढिंढोरा था,
निहत्थे रहकर भी कितनों का अहंकार तोड़ा था,
आर्य आष्टांगिक मार्ग के लिए सारी दुनियां ऋणी है,
अनमोल ज्ञान बांटने वाले उसी के हाथ कटोरा था,

उस महात्मा को एक दुराचारी डाकू ने भी टोका था,
गले में मुंडमाला, नीयत, किस्मत जिसका खोटा था, 
बुद्ध के शब्दों का हुआ कुछ इस कदर जादुई असर,
चरणों में होकर दंडवत, इंसानियत की राह लौटा था,

Comments

Popular posts from this blog

9. कलमकार की ख्वाहिश

6. जुनून की ज्वाला ...

10. खैरियत पूछने वाला ...