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4. किस किस का नाम....

किस किस का नाम.... सियासत का स्याही न जाने क्यों इतना दागदार होता है, मिलता नहीं उसे हक जो सरल सज्जन, ईमानदार होता है, यहां चीलों के लिए लाशों का ढेर शिद्दत से सजाया जाता है, गुमनाम हो जाते हैं वीर शहीद जिसका मुल्क कर्जदार होता है। गली, सड़क, नगर चौराहे सभी पर लोगों ने नाम लिखवा लिया, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी पर भी अपना परचम लहरा दिया, भगत, राजगुरु, चंद्रशेखर, सुभाष का नाम यहां कहां मिलता है, देश की सारी योजनाओं के आगे किस किस का नाम लिखवा दिया,

3.नया दीपक जलाना है...

अंधेरे की काली बदरी को आज नहीं तो कल मिट जाना है, जिद्द सिर्फ इतनी रहे कि हमें प्रकाश की रौशनी में नहाना है, हवा हो चाहे कितनी तेज, परिस्थितियां हो भले बहुत विकराल, बिना वक्त गंवाए, बिना थके हर पल एक नया दीपक जलाना है, नया दीपक जलाना है...

2. बुद्धम शरणम गच्छामि...

बुद्धम शरणम गच्छामि... उसने एक नहीं कई कई सीमाओं को तोड़ा था, ज्ञान से लबालब, अंहकार का पन्ना कोरा था, सिंहासन के लिए महाभारत तो होता ही रहा है, सिद्धार्थ ने जनकल्याण के लिए सब छोड़ा था, कम बोलते थे फिर भी चारों ओर खूब ढिंढोरा था, निहत्थे रहकर भी कितनों का अहंकार तोड़ा था, आर्य आष्टांगिक मार्ग के लिए सारी दुनियां ऋणी है, अनमोल ज्ञान बांटने वाले उसी के हाथ कटोरा था, उस महात्मा को एक दुराचारी डाकू ने भी टोका था, गले में मुंडमाला, नीयत, किस्मत जिसका खोटा था,  बुद्ध के शब्दों का हुआ कुछ इस कदर जादुई असर, चरणों में होकर दंडवत, इंसानियत की राह लौटा था,

1. खाली सफे ...

खाली सफे मुझे रहने दो कागज़ पर ही लफ्ज़ बनकर यहाँ खुलती है जुंबा, होंठ सील जाते हैं, कहना नहीं चाहते कमबख्त चंद शेर धोखा दे जाते हैं फिर क्यों गला घोटूं इस नीली स्याही का  जब खाली सफ़े भी बहुत कुछ कह जाते  है...

अनुक्रमणिका

अनुक्राणिका 1. लेखकीय